Saturday, August 19, 2023

मन की चंचलता और इसका दुष्परिणाम

मित्रों हम सभी को अच्छे से पता हैं की मन सारी स्थूल और सूक्ष्म इन्द्रियों का राजा है। जिसने पूरे शरीर रूपी महल को अपने वश में किया हैं, लेकिन मन की तीव्रता और इसकी शक्ती अति बलशाली और हठी हैं। मन पर चर्चा ही मन का मंथन माना जायेगा की आखिरकार ये मन है क्या और लोग इतना अधिक इसे लेकर चर्चा और नियंत्रित क्यों करना चाहते हैं। जी दोस्तो आज का ब्लॉग मन और इसके मनमानी पे। 
मन कोई ठोस वस्तु नही हैं की आप इसे देखकर इसकी तिब्रता की दिशा बदल दे। बल्की यह सिर्फ और सिर्फ बुद्धि द्वारा नियंत्रित इंद्रिय हैं। 
ये तो हो गई मन का स्वभाव की बात। अब बात करते हैं की आखिर इसका कंट्रोल क्या हैं और अगर यह इसी तरह मनमानी करता रहा तो इसका बुरा परिणाम क्या हो सकता हैं।
अच्छा उदाहरार्थ कैसे की व्यक्ति को बिच्छू काट लें तो उसका विष कितना चढ़ता हैं और लहर लहर कर उसे दुख पहुंचता हैं।
ठीक वैसे हैं मन मतलब मान लो की एक बंदर को बिच्छू ने डंक मार दिया हो, अब बंदर पहले ही इतना चंचल और बिच्छू डंक मरने के बाद तो उसकी चंचलता का कहना ही क्या और उसमे भी यदि उसे दारू पीला दी जय। तब तो चंचलता की सारी सीमा लांघ जायेगा। ठीक उसी प्रकार हमारा मन हैं, चंचल के साथ हठी भी हैं, इसका मतलब व्यक्ती को पता हैं की उसे ये फला फला काम नही करना हैं परंतु मन उसे किसी भी हरहाल में करवाने के लिए तैयार हैं । यदि मैं गीता की सिख से बात करू तो अर्जुन ने भी यही प्रश्न श्री कृष्ण जी से पूछा था, श्री कृष्ण जी ने मन नियंत्रित करने की बात जब अर्जुन से कही तो, अर्जुन ने सीधे कह दिया की आप कहो तो मैं हवा की दिशा बदल दू लेकिन मन कंट्रोल नही हो सकता इसी बात पर श्री कृष्ण जी ने कहा मन नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय हैं प्रैक्टिस यानी अब ये प्रैक्टिस किस बात के लिए जी हा, अभ्यास के द्वारा बड़ी से बड़ी बुरी आदतों को सफलता में परिवर्तित किया जा सकता हैं। यदि मन बुरी आदतों में फसा है तो इसे दूर करने का एकमात्र उपाय की मन के विपरित ही कार्य किया जाय, यानी बुद्धि की सुनी जाय। और हमे ये समझना हैं की मन ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। और जब हमे अपना दुश्मन पता हो तो उसके कमजोरी के बारे में जानना जरूरी है, और मन की सबसे बड़ी कमजोरी हैं की इसे खाली कभी न छोड़े और इसे हर समय अच्छे संगती या अच्छे कर्मों में व्यस्त रखे।
यदि दुश्मन की कमजोरी पता हैं तो उसको हराना आसान होगा, और दोस्तो मन यदि हमारे आदतों या हमारे लक्ष्च को पाने में एक अच्छा और ठोस दोस्त भी बन सकता हैं। लेकिन पहले हमे इसे अच्छी आदतों में व्यस्त करना होगा। 

मन नियंत्रण के उपाय
१) मन हरदम व्यस्त रखे।
२) हमारा उठना बैठना किन लोगो के साथ है। यदि वह बुरी संगति में है तो इसका परिणाम भी बड़ा भयावह होगा।
३) मन को हरदम एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस देनी होगी।
४) मंत्र और योग के द्वारा मन को स्थिर किया जा सकता हैं
५) मन पर पड़े बुरे इंप्रेशन को हटाना बहुत मुस्किल हैं लेकिन इसे मंत्र मेडिटेशन द्वारा कंट्रोल किया जा सकता हैं।
६) मन हठी है जिसे अच्छी आदत शुरुआत कराना कठिन है पर एक बार जरूर अच्छे आदतों 

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