Thursday, January 26, 2023

कुंभ मेला अद्भुत और भव्य

कुंभ का अर्थ होता है घड़ा l यानी अमृत का कलश या घड़ा जिसमे अमृत भरा हो और इसी अमृत को पीने से अमरत्व पाया जा सकता था l और यह समुंद्र मंथन से निकला लेकिन इसके पहले कालकूट नाम का विष निकला, जिसे भगवान शिव जी ने अपने कंठ में धारण किया और हो गए नीलकंठ भगवान, अमृत निकलने के पश्चात इंद्र के इशारे पर उसका पुत्र जयंत जो अमृत का घड़ा लेकर भागने लगा, इसी घड़े की प्राप्ति के लिए स्वर्ग ने देवताओ और असुरों के बीच 12 दिनों तक युद्ध हुआ जो धरती पर 12 वर्ष के बराबर हैं, इंद्र के बेटे जयंत के घड़े से अमृत की बूंदे भारत में चार जगहों पर गिरि ओ स्थान है, उत्तराखंड राज्य हरिद्वार के गंगा नदी में, मध्य प्रदेश राज्य उज्जैन शिप्रा नदी में, महाराष्ट्र राज्य नासिक के गोदावरी, और उत्तर प्रदेश राज्य प्रयाग(इलाहाबाद) के गंगा यमुना सरस्वती जिसे संगम स्थल कहा जाता है, ऐसा कहा जाता हैं कुंभ के समय इन नदियों का जल अमृततुल्य हो जाता हैं।
मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ जन्म माना जाता है, और मनुष्य अपने जीवन में मन कर्म और वचन से न जाने अनगिनत पाप करता है ऐसा कहा जाता हैं जो मनुष्य इस कुंभ में स्नान करता है उसके सारे पाप कट जाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। लोग नदी में स्नान कर के संतो के प्रवचन सुनते हैं जिससे मन भी निर्मल हो जाता हैं,
कुंभ हर तीन साल के अंतर में हरिद्वार से शुरू होता है। हरिद्वार के बाद, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में मनाया जाता है। प्रयाग और हरिद्वार में मनाए जानें वाले कुम्भ पर्व में एवं प्रयाग और नासिक में मनाए जाने वाले कुम्भ पर्व के बीच में 3 सालों का अंतर होता है। यहां सभी लोग श्रद्धा पूर्वक आके स्नान ध्यान और भजन करते हैं यह सभी संप्रदाय का जमावड़ा होता हैं और भव्य भीड़ होती हैं, इसी शाही स्नान प्रयागराज में लगभग 2 करोड़ लोग  होने की संभावना व्यक्त की गई थी। और 12 करोड़ लोगो के आने की संभावना व्यक्त की गई जिसे सेटेलाइट से भी रिकार्ड किया गया है।कुंभ में 40 हज़ार एलईडी लाइट के साथ ही, लेज़र शो के ज़रिए सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाए जाने की व्यवस्था भी की जाती हैं। और सरकार के द्वारा भीड़ नियंत्रण व्यवस्था भी की जाती हैं साथ ही साथ लोगो के लिया हॉस्पिटल भी होते हैं।
प्रयागराज में अगला कुंभ मेला 2025 में होगा।
नासिक का अगला कुंभ मेला 2027 में होगा 
उज्जैन का अगला कुम्भ मेला 2028 और
हरीद्वार में कुम्भ मेला 2021 में हो चुका है।

कुम्भ योग ग्रहों की निम्न स्थिति के कारण बनता है-

जब सूर्य और चंद्र मकर राशि में होते हैं और अमावस्या होती है तब मेष या वृषभ के बृहस्पति होते हैं तो प्रयाग में कुम्भ महापर्व का योग होता है। इस अवसर पर त्रिवेणी में स्नान करना 1000 अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना जाता हैं,  एक लाख बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने के बराबर माना जाता हैं ।
 कुम्भ के इस अवसर पर तीर्थ यात्रियों को मुख्य दो लाभ होते हैं- गंगा स्नान तथा सन्त समागम।
जिस समय गुरु कुम्भ राशि पर और सूर्य मेष राशि पर हो, तब हरिद्वार में कुम्भ पर्व होता है।
जब गुरु सिंह राशि पर स्थित हो और सूर्य, चंद्र कर्क राशि पर हों, तब नासिक में कुम्भ होता है।
जिस समय सूर्य तुला राशि पर स्थित हो और गुरु वृश्चिक राशि पर हो, तब उज्जैन में कुम्भ पर्व मनाया जाता है।

गंगा स्नान:
गंगा नदी हिंदुओं के लिए देवी और माता समान है। इसीलिए हिंदुओं के लिए गंगा स्नान का बहुत महत्व है। गंगा जीवन और मृत्यु दोनों से जुडी़ हुई है इसके बिना हिंदू संस्कार अधूरे हैं। गंगाजल अमृत समान है। इलाहाबाद कुंभ में गंगा स्नान, पूजन का अलग ही महत्व है। अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, पूजन, दान महत्त्वपूर्ण माना गया है। गंगाजी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें  गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं। गंगा स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है और सारे पापों का नाश होता है। मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। अमावस्या दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित तर्पण और पिंडदान करने से सदगती की प्राप्त होती है और यही शास्त्रीय विधान भी है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि कुंभ स्थल के पवित्र जल में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  इसीलिए तो गंगाजी में स्नान करने से सात्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है।



   

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