How To Kill Men And Get Away With It. इस book ki इतनी चर्चा क्यों होने लगी।

किताब की कहानी: "हाउ टू किल मेन एंड गेट अवे विद इट"
ये एक eye catching टाइटल है। आज समाज में अपराधी स्त्री हो या पुरुष। अपराध करने वाला हमेशा से दोषी होता हैं।
इस बुक को देखकर लगता हैं कि पुरुष को मारने के तरीके बताए होंगे जबकि इस बुक में ऐसा कुछ भी नहीं है।
इस बुक की राइटर है केटी ब्रेंट

क्या आप कभी किसी सीरियल किलर से हमदर्दी महसूस कर सकते हैं? सुनने में अजीब लगता है, है ना? लेकिन यही इस किताब की सबसे बड़ी खासियत है। यह एक डार्क कॉमेडी थ्रिलर है, जो हंसाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है। यह किताब हत्या को बढ़ावा नहीं देती — बल्कि समाज में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा, ताकतवर लोगों की मनमानी, और कानून की कमजोरियों पर करारा तंज कसती है
कहानी की हीरोइन है किटी कोलिंस — एक चमकती-दमकती सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर। बाहर से देखने पर उसकी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट लगती है — पैसा, शोहरत, आजादी। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा राज छिपा है, जो किसी को भी हैरान कर दे।

एक रात, क्लब से घर लौटते समय किटी का सामना एक ऐसे आदमी से होता है जो उसका पीछा करता है और उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। खुद को बचाने की जद्दोजहद में हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि उस आदमी की मौत हो जाती है। मतलब ऐक्सिडेंटल मृत्यु जो ओ नहीं करना चाहती थी। यह घटना किटी की पूरी दुनिया हिला देती है। वह सदमे में है, डरी हुई है — फिर भी किसी तरह खुद को संभालती है और पुलिस की नजरों से बच निकलती है।
इस घटना के बाद किटी के अंदर कुछ बदलाव हो जाता है। उसे एहसास होता है कि दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो महिलाओं का शोषण करते हैं, उन्हें डराते हैं, और कानून की खामियों का फायदा उठाकर बेखौफ घूमते रहते हैं।
धीरे-धीरे उसका गुस्सा एक मकसद में बदल जाता है। जी हा एक ऐसा मकसद जो कही न कही उन अपराध करने वाले के लिये बदला। वह ऐसे लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देती है, जिन्हें वह खतरनाक और गुनहगार मानती है। हालांकि इस पुस्तक में उसका पर्सनल व्यू दिखाया ह कि अपराध की परिभाषा उसके हिसाब से ओ लोग जिनको कानून का डर नहीं और बिना वजह स्त्रियों के साथ अत्याचार में लिप्त है। दुनिया के लिए वह अब भी वही मुस्कुराती हुई सेलिब्रिटी है — लेकिन अंदर से वह बिल्कुल एक अलग इंसान बन चुकी है। अलग इंसान मतलब ओ एक्सीडेंटल डेथ उसके जीवन का टर्निंग मोड़ साबित होता हैं।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, शहर में एक के बाद एक रहस्यमयी मौतें होने लगती हैं। किटी अब इन सभी चीजों की आदी हो चुकी हैं उसका मन अब पहले जैसा अपराधबोध या किसी भी प्रकार का पश्चाताप की भावना नहीं रह जाती हैं। उसे सबूत मिटाने और पुलिस से बचने के तरीकों में दिलचस्पी बढ़ चुकी थी। पुलिस को समझ आ जाता है कि यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं — कोई खतरनाक कातिल आजाद घूम रहा है।

जांच तेज होती है, और खतरा किटी के करीब आने लगता है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं रहता कि अगला निशाना कौन होगा — बल्कि यह भी कि क्या किटी अपना राज छुपा पाएगी, या सच सामने आ ही जाएगा।
इस पुस्तक में इतने ट्विस्ट हैं कि पढ़ने वाले की राय बार-बार बदलती रहती है। कभी किटी गलत लगती है, तो कभी उसके साथ हुआ अन्याय और कभी किटी द्वारा किया गया अपराध।
यही किताब की जान है — यह बुक पढ़ने वाले को लगातार एक नैतिक उलझन में डाले रखती है:
न्याय आखिर है क्या — कानून का फैसला, या किसी पीड़ित का गुस्सा?
 जब व्यवस्था बार-बार नाकाम होती है, तो लोगों के अंदर गहरा गुस्सा जन्म ले सकता है।
हर इंसान सिर्फ काला या सफेद नहीं होता— किटी जैसा किरदार दिखाता है कि हालात इंसान को कैसे बदल सकते है

यह किताब हिंसा को सही नहीं ठहराती — यह बस एक आईना दिखाती है कि जब समाज महिलाओं की सुरक्षा में नाकाम रहता है, तो नतीजे कितने खतरनाक हो सकते हैं। 

हालांकि इतने मर्डर और अपराध करने वाली किटी को पुलिस अंत तक पकड़ नहीं पाती हैं। ये बुक एक सस्पेस थ्रिलर हैं। लेकिन पुलिस इतनी शासक्त हैं कि अपराधी को खोज निकाले लेकिन पुस्तक में सिर्फ महिला की मानसिक स्थिति के बदलाव को अधिक जोर देती हैं।

शुरुआत में इस बुक पढ़ने वाले को लगता है कि शायद किटी सही कर रही है, क्योंकि जिन लोगों को वह मार रही है वे बुरे हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती हैकिटी खुद भी बदलने लगती है। अब वह सिर्फ न्याय करने वाली लड़की नहीं रहती, बल्कि एक हत्यारी बन जाती है। उसे झूठ बोलना पड़ता है, सबूत छिपाने पड़ते हैं, हर समय पकड़े जाने का डर रहता है। धीरे-धीरे उसकी इंसानियत भी कम होने लगती है।

यही पर एक गंभीर प्रश्न मन में आता हैं कि 

अगर कोई इंसान बहुत बुरा है, तो क्या उसे मार देना सही हो जाता है? और अगर आप किसी बुरे इंसान को मारते हैं, तो क्या आप खुद अच्छे इंसान बने रहते हैं?

इस किताब का असली संदेश यही है। ये बुक यह नहीं कहतीं कि "पुरुषों को मारो।" बल्कि वह दिखाती हैं कि जब समाज अन्याय को रोकने में असफल हो जाता है, तब कुछ लोग बदले का रास्ता चुन लेते हैं। लेकिन बदला लेने वाला इंसान भी धीरे-धीरे उसी अंधेरे में खो जाता है जिससे वह लड़ना चाहता था।

"अन्याय का जवाब अगर हिंसा से दिया जाए, तो अंत में न्याय नहीं, बल्कि एक नया अपराध पैदा होता है।"

 Title जानबूझकर चौंकाने वाला रखा गया है, लेकिन कहानी का असली उद्देश्य समाज, न्याय, बदले और नैतिकता पर सोचने के लिए मजबूर करना है।

आपकी क्या राय है — क्या नैतिक रूप से उलझे हुए किरदार कहानी को दिलचस्प बनाते हैं, या अपराधी हमेशा अपराधी ही रहता है?

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